Rahul Gandhi Detained: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने के बाद मामला आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच चुका है। एक ओर कांग्रेस ने ECI द्वारा बैठक करने की मांग को ठुकराने का आरोप लगाया है, तो वहीं ECI ने कांग्रेस के आरोपों के जवाब में कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहले बैठक का अनुरोध नहीं किया गया था और बाद में आया अनुरोध भी आयोग के प्रोटोकॉल के मुताबिक नहीं था। आयोग ने यह भी कहा कि उसने ज्ञापन लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारी भेजने का विकल्प दिया था।
कांग्रेस पार्टी के (Rahul Gandhi Detained) आरोप

कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों का आरोप था कि वह सभी आयोग से सीधे मिलकर SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाना चाहता था। राहुल गांधी ने सवाल किया कि जब विपक्षी सांसद चुनाव आयोग से मिलने आए हैं तो उनसे मुलाकात क्यों नहीं की जा रही। वहीं विपक्ष के आरोपों के जवाब में इलेक्शन कमीशन की ओर से कहा गया कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने आयोग से बैठक के लिए औपचारिक अनुरोध नहीं किया था। आयोग के मुताबिक, करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस से उसे जानकारी मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में करीब 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल मिलना चाहता है।
“vote chori” का कांग्रेस ने लगाए आरोप
विपक्षी पार्टियां, खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, SIR की प्रक्रिया को “Vote Chori” का एक माध्यम बताकर देश की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा और चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ऐसे कई आरोप लगाए, जिनमें नरेंद्र मोदी की सरकार को जमकर निशाना बनाया गया।
लेकिन आपको साफ तौर पर बता दें कि अब तक ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे भाजपा और चुनाव आयोग के बीच कथित मिलीभगत का आरोप साबित होता हो।
भाजपा की भी ( Rahul Gandhi Detained) प्रेस कांफ्रेंस

एक ओर राहुल गांधी दिल्ली की सड़कों पर इलेक्शन कमीशन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे तो वहीं दूसरी ओर भाजपा की ओर से संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इसे विपक्ष और राहुल गांधी की हताशा बताया है। संबित पात्रा ने कहा, किसी भी आरोप को समझने से पहले तारीख देखना जरूरी है। ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC का पद संभाला था। ऐसे में 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव तो उनके CEC बनने से पहले हुए ही थे, 2024 का लोकसभा चुनाव भी उनके मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले संपन्न हो चुका था।
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बीजेपी का तर्क है कि जिन चुनावों के नतीजों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें से 2014 और 2019 के दौरान ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग का हिस्सा ही नहीं थे, जबकि 2024 में वे चुनाव आयुक्त थे, लेकिन CEC नहीं थे।
अपने-अपने दावें लेकिन राजनीति भरपूर
सत्ता पक्ष अपने बचाव में दलीलें पेश कर रहा है तो वहीं विपक्ष अपनी तरफ से तमाम आरोपों के माध्यम से सत्ता पक्ष के खिलाफ माहौल बनाने में जुटा हुआ है। सबसे खास बात इस पूरे विवाद से जो सामने आती है, वह है राजनीति। इस पूरे मुद्दे पर जमकर राजनीति होती दिखाई दे रही है। आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आने वाले साल में देश के कई राज्यों में होने वाले चुनावों की सुगबुगाहट भी है। चूंकि SIR की प्रक्रिया पहले भी होती रही है, ऐसे आरोप पहली बार सामने आए हैं। अब देखना (Rahul Gandhi Detained) होगा कि चुनाव आयोग इस मुद्दे पर क्या संज्ञान लेता है।
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