जसवंत कुमार उर्फ लक्ष्मीकांत की जुबानी
Shri Ganesh Dramatic Club
कशिश नरवालियां बरनाला: आज 50 वर्ष होने पर भी ऐसे लगता है जैसे कल की बातें हो जब श्री गणेश ड्रामाटिक क्लब बरनाला की स्थापना की थी। तब केवल पांच मैंबर थे आगे बढ़ते गये कारवां बनता गया। शुरुआत दौर में कीर्तन जागरण करने लगे।
फिर श्री कृष्ण जन्म अष्टमी मनाने लगे, महंत जानकीदास के डेरे में झांकियां बनाते, चलती फिरती झांकी निकालते ,आगे बढ़ते हुए रामलीला में नाटक खेलने लगे।
Shri Ganesh Dramatic Club

बहुत ही मशुरूर नाटक “रूप बसंत” रात 9 बजे से सवेरे 5:00 बजे तक खेला था, आज भी सभी बुजुर्गों को याद है ।
पास खत्म हो गये कागज के टुकड़े काट कर पास बनाये थे ग्राउंड में जगह नही थी लोग मन्दिर की छत पर किले की दीवार पर बैठे थे। फिर कभी भी राम लीला कमेटी ने स्टेज नहीं दी ।
महाशकित ड्रामाटिक कल्ब वालो ने हमारा साथ दिया हमें खुद नाटक खेलने को स्टेज दी। हम आगे बढ़ते गये दशहरा मेला लगाने का विचार किया, अब लगाए कहां जगह तलाश की गई बहुत संघर्ष करना पड़ा।
श्री गणेश ड्रामाटिक क्लब का 1976 से 1990 तक मैं जरनल सैक्ट्री रहा। बरनाला शहर में पहली बार दिल्ली का मशहूर बैंड जिया बैंड बुलाया गया था अब शहर के दो दशहरे लगने लगे। भारतीय महावीर दल पहले से लगाता आ रहा था। वो शोभा यात्रा निकालते थे। हमने सब कुछ बदल दिया था।
दो दशहरे व शोभा यात्रा के दौरान परेशानी होने लगी। शहर के प्रतिष्ठित लोगों सहित वरिंदर डाउ व मैंने (Shri Ganesh Dramatic Club) विचार किया दोनो कल्ब मिलकर दशहरा लगाएंगे।
आज तक वही समझौता चल रहा है। यह समझोता हमेशा ऐसा ही चलता रहे मुझे खुशी है। हमारा लगाया पौधा आज बड़ा वटवृक्ष बन गया है मेरे मित्र आज इस कल्ब को ऊंचाइयों तक ले जा रहे है मेरे परम मित्र सतपाल गांधी को मैं सतपाल को बधाई देता हूं कि उनके मार्गदर्शन में यह क्लब दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है और आगे भी इसी तरह तरक्की करता रहे।
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