Kejriwal Sisodia Punjab Visit: पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया की सक्रियता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मई और जून 2026 के दौरान पंजाब के कई दौरे करने वाले केजरीवाल अब पहले की तरह लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर क्यों नहीं आ रहे? क्या विपक्ष की ओर से बाहरी नेताओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच दोनों नेताओं की पंजाब में सक्रियता का पैटर्न बदल गया है?
विधानसभा चुनाव की तैयारियों से गायब?
मई में केजरीवाल ने लुधियाना का दौरा किया था, जबकि जून में बठिंडा और जालंधर समेत पंजाब के विभिन्न स्थानों पर उनकी राजनीतिक गतिविधियां सामने आई थीं। पार्टी की बैठकों और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच केजरीवाल पंजाब की राजनीति में सक्रिय नजर आ रहे थे। मनीष सिसोदिया भी पार्टी संगठन से जुड़ी बैठकों और गतिविधियों में हिस्सा ले रहे थे।
निशाने पर केजरीवाल और भगवंत मान

पंजाब में विपक्ष लंबे समय से अरविंद केजरीवाल को बाहरी नेता और मुख्यमंत्री भगवंत मान को कथित तौर पर कठपुतली मुख्यमंत्री बताकर निशाना साधता रहा है। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा समेत विपक्षी नेताओं ने पंजाब में दिल्ली के नेताओं की भूमिका और सरकारी आवासों में उनके कथित ठहराव को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
विपक्ष ने केजरीवाल की विपश्यना यात्रा और उनके काफिले पर होने वाले खर्च को लेकर भी भगवंत मान सरकार को घेरा है। दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने केजरीवाल के काफिले को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पंजाब के खजाने से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने भी पंजाब के संसाधनों और बाहरी नेताओं की भूमिका को लेकर राज्य सरकार पर (Kejriwal Sisodia Punjab Visit) निशाना साधा था।
दोनों नेताओं की सक्रियता (Kejriwal Sisodia Punjab Visit) का पैटर्न?
विपक्ष के इन आरोपों के बीच अब सवाल उठ रहा है कि जून में लगातार पंजाब के दौरे करने वाले केजरीवाल और सिसोदिया की मौजूदा सक्रियता कैसी है। क्या दोनों नेताओं के पंजाब दौरों में कमी आई है? क्या बाहरी नेताओं को लेकर उठ रहे सवालों के बाद आम आदमी पार्टी की रणनीति में कोई बदलाव दिखाई दे रहा है?
अमित शाह 20 अक्टूबर को आएंगे पंजाब, मानसा दौरे की भी चर्चा
मनीष सिसोदिया की पंजाब में मौजूदगी और राज्य के राजनीतिक मुद्दों पर दोनों नेताओं की सार्वजनिक सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खैर, अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि केजरीवाल और सिसोदिया की पंजाब में सक्रियता में बदलाव किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है या फिर विपक्ष की ओर से लगातार उठाए जा रहे सवालों का असर है। क्या वाकई बाहरी नेताओं और भगवंत मान को कठपुतली मुख्यमंत्री बताए जाने वाले आरोपों ने आम आदमी पार्टी के नेताओं पर दबाव बनाया है, या इसके पीछे कोई दूसरी रणनीति है? फिलहाल, इन सवालों के (Kejriwal Sisodia Punjab Visit)जवाब का इंतजार रहेगा.
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