Amit Shah Attack on Rahul Gandhi: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ स्थापना दिवस समारोह के मंच से कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर लिया। दिल्ली में 1984 के सिख नरसंहार की बरसी के दिन कांग्रेस की ओर से आयोजित रैली को लेकर उन्होंने पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए।
‘मोहब्बत की दुकान’ के नारे पर तंज
अमित शाह ने राहुल गांधी की ‘मोहब्बत की दुकान’ के नारे पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस एक तरफ मोहब्बत की बात करती है, लेकिन उसके राजनीतिक बयानों और रवैये में नफरत झलकती है। शाह के इस बयान ने कांग्रेस के इस चर्चित नारे पर एक बार फिर सियासी बहस छेड़ दी है। उनके निशाने पर राहुल गांधी की राजनीति रही, जिसे लेकर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि मोहब्बत की दुकान के नाम पर आखिर लोगों को नफरत के अलावा क्या मिल रहा है।
मॉक पार्लियामेंट को लेकर (Amit Shah Attack on Rahul Gandhi) कांग्रेस पर साधा निशाना
अमित शाह ने कांग्रेस की चुनावी हार और राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में लगातार तीन चुनावों में कांग्रेस को करारी हार मिली है और सोनिया गांधी का राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का सपना अब तक पूरा नहीं हो पाया है। शाह ने कांग्रेस के मॉक पार्लियामेंट आयोजन पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी ने अब इसके जरिए राजनीति का नया रास्ता तलाश लिया है। उन्होंने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री बनना है तो उन्हें पूरी जिंदगी मॉक पार्लियामेंट में ही बने रहना चाहिए, क्योंकि इसके अलावा कहीं और उनका नंबर लगने वाला नहीं है।
1984 सिख नरसंहार की बरसी पर अमित शाह के बयान ने खींचा ध्यान
अमित शाह ने 1984 के सिख नरसंहार की बरसी के मौके पर कांग्रेस को घेरते हुए राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने एक नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की रैली आयोजित किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसी दिन दिल्ली में हजारों सिखों की हत्या हुई थी। ऐसे दिन राजनीतिक रैली करना सिख समुदाय के पुराने जख्मों को कुरेदने जैसा है। शाह ने कहा कि 1984 की उस त्रासदी में न जाने कितने परिवार बिखर गए, कई बच्चे अनाथ हुए और महिलाओं ने (Amit Shah Attack on Rahul Gandhi) अपने जीवनसाथी खो दिए।

त्रासदी के जख्म आज भी सिख (Amit Shah Attack on Rahul Gandhi) समुदाय की यादों में ताजा
अमित शाह ने 1984 के सिख नरसंहार का जिक्र करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के चर्चित बयान ‘जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है’ को भी याद किया। उन्होंने इस बयान के जरिए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि उस दौर में हजारों सिखों की जान गई, परिवार उजड़ गए और कई बच्चे अनाथ हो गए।
अमित शाह ने मानी योगी आदित्यनाथ की बादशाहत!
शाह ने कहा कि इस घटना को पंजाब और देश के लोग आज भी नहीं भूले हैं। 1984 की उस त्रासदी के जख्म आज भी सिख समुदाय की यादों में (Amit Shah Attack on Rahul Gandhi) ताजा हैं।
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