Golden Temple Amritsar: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रथम प्रकाश पर्व को लेकर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। प्रथम प्रकाश पर्व के अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमृतसर पहुंचे और श्री दरबार साहिब में नतमस्तक होकर गुरु घर का आशीर्वाद लिया।
सुबह से ही श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में संगत की आमद लगातार बनी रही। श्रद्धालु कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते हुए गुरबाणी कीर्तन और नाम सिमरन में शामिल होते नजर आए। परिवारों के (Golden Temple Amritsar) साथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने श्री गुरु रामदास जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए शुक्राना किया।
देश-विदेश से पहुंची संगत
प्रथम प्रकाश पर्व में शामिल होने के लिए पंजाब के विभिन्न शहरों और गांवों के अलावा देश के दूसरे हिस्सों तथा विदेशों से भी श्रद्धालु अमृतसर पहुंचे। संगत ने श्री दरबार साहिब में माथा टेका और गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया।

श्रद्धालुओं का कहना था कि श्री दरबार साहिब में पहुंचने से मन को सुकून और आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। उनका कहना था कि गुरबाणी कीर्तन और यहां का वातावरण मन को (Golden Temple Amritsar) सकारात्मक ऊर्जा देता है।
फूलों की सजावट ने मोहा मन
प्रथम प्रकाश पर्व के अवसर पर श्री दरबार साहिब में विशेष फूलों की सजावट की गई। परिसर को अलग-अलग तरह के फूलों से सजाया गया, जिसने पूरे वातावरण को और भी आकर्षक बना दिया। फूलों से सजे श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
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गुरबाणी की मधुर ध्वनि, नाम सिमरन और फूलों से सजे परिसर का दृश्य संगत के लिए आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र बना रहा।
बाबा बुद्ध जी पहले ग्रंथी नियुक्त
श्री गुरु अर्जन देव जी द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पहली बीड़ तैयार करवाए जाने के बाद, 1604 ईस्वी में श्री हरिमंदिर साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर बाबा बुद्ध जी को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला ग्रंथी नियुक्त किया गया।
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बाबा बुद्ध जी सिख परंपरा में अत्यंत सम्मानित व्यक्तित्व थे और उन्होंने लंबे समय तक गुरु घर की सेवा निभाई। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रथम प्रकाश पर्व श्रद्धा और सम्मान के (Golden Temple Amritsar) साथ मनाया जाता है।

