Fake Ghee Factory: खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग और खमाणों पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार रात बिलासपुर रोड पर चल रहे एक कथित नकली देसी घी निर्माण केंद्र का भंडाफोड़ किया। यह फैक्टरी एक किराये के मकान में संचालित हो रही थी।
छापेमारी के दौरान टीम को मौके से 2 क्विंटल 86 किलो तैयार नकली देसी घी मिला। इसके साथ ही 6 क्विंटल वनस्पति घी और 4 क्विंटल रिफाइंड तेल भी बरामद किया गया। फैक्टरी में घी की पैकिंग और बिक्री की तैयारी के लिए मशीनों के अलावा खाली डिब्बे, रैपर और सील लगाने वाली मशीनें भी रखी गई थीं, जिन्हें टीम ने जब्त कर लिया।
मिलावट का धंधा (Fake Ghee Factory) पिछले डेढ़ से दो साल से जारी
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, बिलासपुर रोड पर किराये के मकान में चल रहा यह कथित मिलावट का धंधा पिछले डेढ़ से दो साल से जारी था। यहां वनस्पति तेल के साथ अलग-अलग रसायनों और रंगों का मिश्रण तैयार कर उसे देसी घी के रूप में पैक किया जाता था। इसके बाद तैयार उत्पाद को प्रसिद्ध ब्रांड ‘मेधा शाम’ के नाम वाले डिब्बों में भरकर बाजार में भेजा जा रहा था। इस तरह कथित तौर पर नकली घी को असली ब्रांड के उत्पाद के रूप में बेचने की तैयारी (Fake Ghee Factory) की जा रही थी।
अब तक कैसे नहीं लगी किसी को भनक?
अधिकारियों के अनुसार, जगराओं निवासी अतुल कुमार इस कथित अवैध फैक्टरी का संचालन कर रहा था। इसकी जानकारी विभाग और पुलिस को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर हुई, जिसके बाद संयुक्त टीम ने मौके पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए घी के सैंपल प्रयोगशाला में जांच के लिए (Fake Ghee Factory)भेजे गए हैं।
Elenta Mart Barnala में सेहत विभाग की छापेमारी
अब लैब रिपोर्ट से ही उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल किए गए पदार्थों की पुष्टि हो सकेगी। हालांकि, इस पूरे मामले में एक अहम सवाल भी सामने आता है कि यदि यह कारोबार पिछले डेढ़ से दो वर्षों से संचालित हो रहा था, तो खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित निगरानी के बावजूद इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी?
क्या विभाग को इस अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं थी या फिर इसकी पहचान केवल मुखबिर की सूचना मिलने के बाद ही हो सकी? यह पहलू भी (Fake Ghee Factory) जांच के दायरे में आना जरूरी है।

खपत पर प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही?
पंजाब में नकली और संदिग्ध देसी घी की बरामदगी के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं। हाल के महीनों में लुधियाना के दीप नगर से करीब 3,000 लीटर संदिग्ध घी, जालंधर में लगभग 250 किलो देसी घी और रिफाइंड तेल तथा अब खमाणों में 2 क्विंटल 86 किलो कथित नकली घी बरामद किया गया है।
वहीं, सितंबर 2026 में कोटकपूरा में 22 हजार लीटर घी की बड़ी खेप पकड़ी गई थी, जिसकी प्रयोगशाला जांच में गुणवत्ता असुरक्षित और (Fake Ghee Factory) उत्पाद मिसब्रांडेड पाया गया था।
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इन कार्रवाइयों के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने के बाद भी ऐसी घटनाओं में कमी क्यों नहीं आ रही? क्या छापेमारी और माल जब्त करने तक ही कार्रवाई सीमित रह जाती है या फिर इन अवैध कारोबारों की सप्लाई चेन और बाजार में इनकी खपत पर प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही?
बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामले खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था, नियमित निरीक्षण और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की (Fake Ghee Factory)प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करते हैं।

