Waris Punjab De vs SAD: 2027 चुनावों को लेकर शिरोमणि अकाली दल के पंथिक वोटों में संभावित सेंध की चुनौती पेश कर रही वारिस पंजाब दे को लेकर सुखबीर बादल ने सीधे हमलावर रुख अपना लिया है। अकाली दल के प्रधान ने इसकी शुरुआत काफी दिन पहले ही कर दी थी, लेकिन अब दोनों दलों की राजनीतिक बयानबाजी ने पंजाब की राजनीति में इन्हें चर्चा में ला दिया है।
अलग-अलग राजनीतिक सम्मेलन

पंथिक वोटों को साधने के लिए दोनों ही राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में 26 सितंबर को लुधियाना के छपार मेले में SAD और Waris Punjab De ने अलग-अलग राजनीतिक सम्मेलन किए। इन सम्मेलनों के जरिए दोनों दलों ने पंथिक वोटों को अपने पाले में करने और 2027 के विधानसभा चुनाव में अपने पक्ष में मतदान के लिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की।
आपको बता दें कि SAD और Waris Punjab De के अलावा CPI(M) की ओर से भी छपार मेले में राजनीतिक सम्मेलन किया गया था। हालांकि, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा की ओर से इस मौके पर राजनीतिक सम्मेलन आयोजित नहीं किया गया।
सुखबीर बादल का अयाली पर निशाना
SAD छोड़कर Waris Punjab De का दामन थामने वाले मनप्रीत सिंह अयाली को लेकर सुखबीर बादल ने जमकर निशाना साधा। अयाली के खिलाफ छपार मेले में बादल ने कहा कि अयाली और WPD मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ मिलकर पंथिक वोटों को बांटने का काम कर रहे हैं, जिससे AAP को फायदा हो सकता है। यानी सुखबीर बादल ने अपने बयान के जरिए WPD और SAD छोड़कर गए मनप्रीत अयाली पर AAP को फायदा पहुंचाने के लिए पंथिक वोटों को बांटने का आरोप लगाया।

अयाली का प्रभाव (Waris Punjab De vs SAD) क्षेत्र
अयाली लंबे समय तक SAD से जुड़े रहे और तीन बार के विधायक रहे हैं। जून 2026 में उनके WPD में जाने के बाद वह WPD के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अयाली ने WPD में शामिल होने के समय पार्टी के काम को संविधान के दायरे में रखने की शर्त पर जोर दिया था। हाल में ही उनकी उपस्थिति में पंजाब के दो पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने WPD में राजनैतिक एंट्री ली थी।
बता दें, छपार मेले में आयोजित दोनों पार्टियों का सम्मेलन अयाली के प्रभाव क्षेत्र में आता है। इसी इलाके में अयाली का विधानसभा क्षेत्र ही डाखा है।
नौकरियों में पंजाबियों को प्राथमिकता
SAD सिर्फ पंथिक वोटों तक सीमित नहीं है। सुखबीर बादल अपने बयानों में रोजगार, 3 लाख सरकारी पद भरने, युवाओं के लिए ₹10 लाख तक ब्याज मुक्त कर्ज, शगुन योजना की सहायता ₹1 लाख करने और बुजुर्गों की पेंशन ₹3,100 प्रतिमाह करने जैसी घोषणाएं करके सभी पंजाबियों तक अपनी राजनीति पहुंचाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। इन योजनाओं में पंजाबियों को प्राथमिकता देने की बात भी (Waris Punjab De vs SAD) सुखबीर बादल की ओर से कही जा रही है।
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इससे WPD के मुकाबले SAD की राजनीति को केवल पंथिक मुद्दों तक सीमित न रखकर रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कल्याणकारी योजनाओं और कानून-व्यवस्था (Waris Punjab De vs SAD) जैसे मुद्दों पर भी ले जाने की कोशिश दिखाई देती है।
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