Punjab Congress President: लंबे समय से पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। कांग्रेस हाईकमान ने राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पूर्व ओलंपियन और विधायक परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को लेकर है। क्या नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह कांग्रेस के अलग-अलग धड़ों को एकजुट कर पाएंगे और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एक बार फिर सत्ता में वापसी की राह पर ला पाएंगे?
अध्यक्ष पद की कमान संभालने के बाद पहला बयान
कांग्रेस पंजाब प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद मीडिया से बातचीत में परगट सिंह ने सबसे पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग की तारीफ की। उन्होंने कहा, राजा वडिंग ने लगभग चार-पांच साल तक हमारे अध्यक्ष के तौर पर कड़ी मेहनत की और अच्छा काम किया, लेकिन संगठन में भूमिकाएं बदलना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है… कल मैं सेक्रेटरी या जनरल सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहा था, और आज हम एक सामूहिक इकाई के रूप में काम करते हैं।
राजा जी हमारी टीम के एक अहम सदस्य हैं, और हमारे बीच किसी भी तरह के मतभेद या बंटवारे का कोई सवाल ही नहीं है; मैं सभी वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करता हूं, वे मेरा सम्मान करते हैं, और हमारी एकमात्र प्राथमिकता और ध्यान पंजाब पर ही है…
चन्नी गुट के लिए भी ( Punjab Congress President) संदेश
परगट सिंह के बयान में चन्नी गुट या यूं कहें कि राज्य के वरिष्ठ नेताओं के लिए भी साफ संदेश नजर आया। उन्होंने सभी के सम्मान और स्नेह का जिक्र करते हुए उनके प्रति आभार जताया और यह संकेत देने की कोशिश की कि वह पार्टी के सभी धड़ों को साथ लेकर चलना चाहते हैं। इसके साथ ही पंजाब कांग्रेस के विरोधियों को जवाब देते हुए परगट सिंह ने भाजपा और मौजूदा मान सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता नफरत की राजनीति को स्वीकार नहीं करती और अब प्रदेश में सकारात्मक, सार्थक और एजेंडा आधारित राजनीति की जरूरत है।

परगट सिंह का राजनीतिक इतिहास
1992 तथा 1996 के ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले परगट सिंह ने 2012 का पंजाब विधानसभा चुनाव शिरोमणि अकाली दल (SAD) के टिकट पर जालंधर कैंट से लड़ा और जीत हासिल की। यह उनका पहला विधानसभा चुनाव था। विधायक रहते हुए उनका अकाली नेतृत्व से मतभेद सामने आया। 2016 में उन्हें SAD से निलंबित किया गया। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को पत्र लिखकर पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की कार्यशैली पर सवाल (Punjab Congress President) उठाए।
2016 के अंत में कांग्रेस में शामिल
सुखबीर सिंह बादल से मतभेदों के चलते अकाली दल से निष्कासित परगट सिंह ने 2016 के अंत में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की और 2017 के विधानसभा चुनावों में जालंधर कैंट से जीत दर्ज कर दूसरी बार विधायक बने। 2017 से 2021 के बीच विधायक रहते हुए उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार की कार्यशैली पर भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए। 2020-21 के दौरान उन्होंने बेअदबी, नशे, खनन, बिजली खरीद समझौतों और सरकार के कामकाज जैसे कई मुद्दों को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन (Punjab Congress President) अमरिंदर सिंह के सामने सवाल उठाए थे।
Join Daily Awaz Bharti WA Official Channel Scan QR Code or Click Me


