- Lamrin University Fake Admission Case– दो सीनियर महिला कर्मचारियों का दावा- नियमों पर सवाल उठाए तो शुरू हुई प्रताड़ना; मॉलेस्टेशन, निलंबन और वेतन कटौती के भी आरोप
- यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अरविंदर सिंह चावला, प्रो वी सी बी एस सत्याल, विमल मल्होत्रा सीईओ , एच पी एस धामी, डीन पर लगाये गए आरोप
लमरीन टेक स्किल्स यूनिवर्सिटी में कथित अनियमितताओं को लेकर दो सीनियर महिला स्टाफ सदस्यों ने बुधवार को प्रेस क्लब चंडीगढ़ में मोर्चा खोल दिया। एक साथी और एडवोकेट सुनील मल्लन की मौजूदगी में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं ने यूनिवर्सिटी के उच्च अधिकारियों पर यौन शोषण व अश्लील हरकत के गंभीर आरोप लगाए, शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनसे फर्जी एडमिशन और कथित झूठी डिग्री से जुड़े मामलों में मदद करने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने नियमों के खिलाफ जाने से इनकार किया और लगभग सभी एडमिशन, परीक्षाओं तथा पीएचडी कार्यक्रम की प्रक्रिया पर सवाल उठाए तो कथित तौर पर उन्हें निशाना बनाया गया।
कथित अश्लील ऑडियो (Lamrin University Fake Admission Case) रिकॉर्डिंग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिकायतकर्ताओं ने एक कथित अश्लील ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मीडिया के सामने जारी की। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें अनुचित व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। एक शिकायतकर्ता ने खुद को कथित मॉलेस्टेशन की पीड़िता बताते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की।
एडमिशन-परीक्षा में बाहरी दखल पर सवाल उठाए तो बदला रवैया’
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, यूनिवर्सिटी में एडमिशन और परीक्षा प्रक्रिया में बाहरी लोगों की कथित भूमिका को लेकर उन्होंने सवाल उठाए थे। पीएचडी कार्यक्रम के नियामकीय (Lamrin University Fake Admission Case) नियमों और प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई।
ED के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह और पूर्व DSP बलविंदर सेखों वारिस पंजाब दे में शामिल
एक महिला ने दावा किया कि दिसंबर 2025 में उसे महत्वपूर्ण पद से हटाकर कम जिम्मेदारियों वाली भूमिका में भेज दिया गया। इसके बाद 15 जुलाई 2026 को निलंबित करने, वेतन में 50 फीसदी कटौती करने और कम पद की पेशकश करने का आरोप भी लगाया गया। शिकायतकर्ता ने प्रो वाइस-चांसलर बीएस सत्त्याल पर कथित तौर पर डराने-धमकाने और अपमानजनक व्यवहार के आरोप लगाए।
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एडवोकेट सुनील मल्लन ने कहा कि शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कथित ऑडियो, दस्तावेजों और अन्य (Lamrin University Fake Admission Case) साक्ष्यों की जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की।
एसडीजीपी के जांच आदेश, शिकायतकर्ताओं का दावा
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि मामले की शिकायत के बाद स्पेशल डीजीपी (कम्युनिटी अफेयर्स एंड वूमेन अफेयर्स) गुरप्रीत दियोल ने जांच के आदेश दिए थे। एआईजी वत्सला गुप्ता को कार्यस्थल पर कथित उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव, बदले की कार्रवाई और रोजगार संबंधी अधिकारों से जुड़े आरोपों की जांच करनी थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच के आदेश के बावजूद अब (Lamrin University Fake Admission Case) तक उन्हें अपेक्षित न्याय नहीं मिला।

